जीवन बदल देने वाली कविता। तू ही जिम्मेदार हैं।


Life Changing Poem in Hindi

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हिंदी प्रेरक कविता 


स्वस्थ है शरीर फिर भी
जिंदगी लाचार है। 
माने तू न माने इसका 
तू ही जिम्मेदार है।

देख कितने ख्वाब अपने 
मन में पाले हैं तूने। 
कर बहाना किन्तु कितने 
काम टाले हैं तूने। 

कर सका ना साहस कि
निश्चय पे चल सके।
ना फैसला ही ले सका 
जो जिंदगी बदल सके।

पास तेरे कष्टों के 
आज जो भरमार हैं।
माने तू न माने इसका 
तू ही जिम्मेदार है।


याद कर कि जिंदगी ने
अवसर कई बार दी। 
संशय में तुने हर 
अवसर बेकार की। 

देख के चुनौतीयों को  
सामने न आ सका।
ना मुश्किलों से लड़ने की
हिम्मत दिखा सका। 

पड़ रही हैं आज तुझे 
वक्त की जो मार हैं। 
माने तू न माने इसका 
तू ही जिम्मेदार है।

               

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जिंदगी की दौड़ में
जो आज तू नाकाम हैं।
भाग्य के ये दोष नहीं
कर्म के परिणाम हैं। 

निश्चित ही जीत होगी
आज भी ये मान ले।
किस्मत की बात छोड़
चलने की ठान ले।

किस्मत और बीच तेरे 
ऊँची जो दिवार हैं। 
माने तू न माने इसका 
तू ही जिम्मेदार है।


है नहीं गुनाह धरा पे
खाली हाथ आये तो।
किन्तु हैं अपराध कुछ
बिन किए ही जाए तो।

त्याग के संकोच अब
कूद जा मैदान में। 
देख न असंभव हैं
कुछ भी जहान में। 

सोच तेरे स्वप्न क्यों  
आज भी बेजार हैं।  
माने तू न माने इसका 
तू ही जिम्मेदार है।

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(इस कविता का copyright कराया जा चुका है। इस कविता का मकसद आपको प्रेरित करना है। किसी भी व्यायसायिक कार्य में बिना अनुमति के इसका प्रयोग वर्जित है।)


निचे इस कविता का उदेश्य एवं संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा हैं जिसे आपको अवश्य ही पढ़नी चहिये क्योंकि यह प्रेरणा से भरा हुआ एक अति-प्रेरणादायक लेख हैं।

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कविता का उद्देश्य एवं संक्षिप्त विवरण


यह कविता और इसका उदेश्य (जो निचे प्रस्तुत किया जा रहा हैं) आपको विचलित कर सकता हैं, आपकी अंतरात्मा को झकझोर सकता हैं। किन्तु यह आपके जीवन में एक शल्य चिकित्सा (Surgery) का काम करेगा जो वर्षो पुराने जख्म का उपचार करने में कारगर साबित होगा। कृप्या इस लेख को पूरा पढ़े। 

      इस कविता कि रचना ऐसे लोगो को ध्यान में रख कर कि गई हैं जो लोग पूरी तरह स्वस्थ होते हुए भी अपनी मानसिक कमजोरी कि वजह से एक असफल जीवन जी रहे हैं। जी हां मै एक बार फिर जोर देकर कहना चाहूंगा कि वो लोग अपनी मानसिक कमजोरी कि वजह से असफल जीवन जी रहे हैं।

       आपको आश्चर्य होगा कि ये बात इतनी जोर देकर क्यों कही जा रही हैं,  तो मै यहां आपको एक छोटी सी कहानी से समझाना चाहता हुँ। यह बहोत ही प्रसिद्ध कहानी हैं और शायद आपने भी सुनी होंगी कि - किसी गांव में दो भाई रहते थे। बड़ा वाला बारह साल का था और छोटा वाला दस का था। एक दिन दोनों गांव के बाहर एक कुएँ के पास खेल रहे थे। बड़ा भाई खेलते खेलते अचानक से कुएँ में गिर गया। ये देख छोटा भाई काफी डर गया और जोर-जोर चिल्लाने लगा लेकिन आस पास कोई नहीं था।

      छोटे वाला भाई कुछ सोच पाता उससे पहले ही कुएँ के पास रखी एक बाल्टी और उससे बँधी रस्सी पे उसकी नजर गई। उसने बिना समय गवाएं बाल्टी को कुएँ में फेक दिया और रस्सी को पकड़ कर चिल्लाने लगा,  भईया बाल्टी और रस्सी पकड़ लो मै आपको आपको बाहर खिंच रहा हुँ। 

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  बड़े भाई ने जैसे तैसे रस्सी पकड़ ली और छोटा भाई उसे खींचने लगा। माथे से पसीना बह रहा,  हाथो से खून निकल रहा हैं,  कभी दो कदम आगे तो कभी दो कदम पीछे,  पैर रगड़ खाकर छील गए। कुछ होश नहीं हैं कि क्या हो रहा हैं,  कैसे हो रहा हैं,  कहाँ चोट लग रही बस जैसे तैसे कर के अपने भाई को बाहर खिंच लिया। भाई के बाहर आते ही दोनों जमीन पर गिर पड़े और बेहोस हो गए। 

     कुछ लोगो ने दूर से देखा तो भाग कर आये और दोनों भाइयो के चेहरे पे पानी के छींटे मारकर उन्हें होश में लाये और घटना के बारे में पूछने लगे। जब दोनों भाइयो ने ये सारी बाते गांव के लोगो को बताया तो उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये हुआ कैसे। एक दस साल के बच्चे ने अपने से बड़े उम्र के बच्चे को अकेले कुएँ से बाहर कैसे खींच लिया। 

     लोगो को यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये हुआ कैसे। एक नन्हे से बच्चे में इतनी शक्ति कहाँ से आ गई। यही सोच विचार करते हुए सब गांव के एक बुजुर्ग और अनुभवी व्यक्ति के पास गए और उनसे पूछा कि ये कैसे संभव हैं? एक नन्हे से बच्चे ने अपने से बड़े उम्र के बच्चे को अकेले ही एक रस्सी के सहारे इतने गहरे कुएँ से खिंचकर बाहर निकाल दिया।

     बुजुर्ग व्यक्ति बहोत ही अनुभवी था उसने लोगो से पूछा कि जब बड़ा भाई कुएँ में गिरा और छोटा भाई उसे बाहर निकालने के लिए खिंच रहा था तब वहा कितने लोग थे। सबने एक साथ उतर दिया कि वहा इन दोनों के अलावा कोई भी नहीं था तब बुजुर्ग व्यक्ति झट से बोला पड़ा कि यही तो शक्ति का श्रोत था।

                    

सब लोग आश्चयचकित होकर पूछे,  ये क्या कह रहे हैं आप? वहां किसी का न होना इस छोटे से बालक के शक्ति का श्रोत कैसे हो सकता हैं। बुजुर्ग व्यक्ति ने कहाँ कि जब छोटा भाई अपनी पूरी शक्ति से बड़े भाई को खिंच रहा था तब उससे कोई ये कहने वाला नहीं था कि बेटा तू बहोत छोटा हैं रहने दे तू ये नहीं कर सकता। अगर ये कहने के लिए वहा एक भी व्यक्ति मौजूद होता तो यह छोटा सा बच्चा ऐसा कभी नहीं कर पाता।


      ठीक इसी प्रकार हर व्यक्ति के अंदर असीमित क्षमता होती, एक व्यक्ति कुछ भी कर सकता हैं, वह हर लक्ष्य को हासिल कर सकता हैं। किन्तु, वह नहीं कर पाता क्योंकि उसके आस पास कई लोग उससे ये कहने वाले है कि रहने दे ये बहोत ही मुश्किल काम है तू नहीं कर सकता। यहां तक कि वह स्वयं को भी यही कहने लगता हैं की शायद तू नहीं कर सकता।

      हमारा दिमाग, हमारी क्षमताएं एक ईमानदार कर्मचारी हैं और हम स्वयं इसके मालिक हैं। हम जैसा इन्हे आदेश देते हैं ये ठीक वैसा ही काम करते हैं। यदि हम इन्हे आदेश देते हैं कि कोई काम करना ही हैं तो हमारा दिमाग हमें कई सारे तरीके बता देता हैं कि ये काम ऐसे किया जा सकता हैं। 

       ठीक इसके उलट यदि उसी काम के लिए हम दिमाग को ये संकेत देते हैं कि ये काम नहीं किया जा सकता तो हमारा यही दिमाग कई सारे तथ्य हमारे सामने रख देता है जिससे कि ये लगने लगता हैं कि सच में वह काम किया ही नहीं जा सकता। इस बात को आप भी व्याहारिक रूप से अनुभव कर सकते हैं। 

        सब कुछ आप पर निर्भर करता हैं कि आप अपने दिमाग को क्या निर्देश देते हैं और अपनी क्षमताओं का कैसे और कितना उपयोग करते हैं। 

        ये तो बात हमारे अंदर की शक्ति और क्षमताओं की हो गई अब इस कविता के मूल विषय पे बात करते हैं कि आप स्वस्थ भी हैं और लाचार भी हैं तो इसका जिम्मेदार कौन हैं। जैसा कि कविता में कहा गया है कि इसका जिम्मेदार आप ही हैं ये पूर्णतः सत्य हैं। 

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     इस संसार में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं हैं जिसकी कोई अभिलाषा न हो,  जिसका कोई सपना न हो, जो किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं करना चाहता हो तथा जो जीवन में अपने मनपसंद कार्य में सफल होना नहीं चाहता हो। परन्तु कितने लोग हैं जो अपने सपनो को पूरा करते हैं? चलिए पूरा करने कि बात छोड़ते हैं, कितने लोग हैं जो अपने सपनो पे काम करते हैं तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करते है?  

      एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल 22 प्रतिशत लोग ही अपने लक्ष्य पे थोड़ा बहोत काम करते हैं और केवल 8 प्रतिशत लोग ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। बाकि के 92 प्रतिशत लोग असफल हो जाते हैं।

ये 92 प्रतिशत लोग असफल क्यों हो जाते हैं? इसके तीन कारण हैं: 

1. लोग अपने सुबिधा क्षेत्र (Comfort Zone) से बाहर निकलने कि हिम्मत नहीं कर पाते।

        हर व्यक्ति सफलता प्राप्त करना चाहता तो हैं लेकिन जब इसके लिए त्याग कि आवश्यकता होती हैं तो वह त्याग नहीं कर पाता। वह अपने सुबिधा क्षेत्र (Comfort  Zone) से बाहर नहीं निकल पाता। देखिये जैसे फ्लाईओवर बनाने के लिए ठीक ठाक रास्ते पे भी गड्डा खोदना पड़ता हैं, ठीक उसी प्रकार जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने सुबिधा क्षेत्र से बाहर निकल कर समस्याओं से लड़ना पड़ता हैं,  उनको हराना पड़ता हैं। 

2. अवसर की पहचान न कर पाना

      हर व्यक्ति को उसके जीवन में कई बार अवसर मिलता हैं, लेकिंग 92 प्रतिशत लोग या तो अवसर को पहचान ही नहीं पाते या फिर किसी भी अवसर के लिए तैयार नहीं रहते। जब अवसर हाथ से निकल जाता हैं तो वो इसको भाग्य से जोड़ देते हैं, जबकि इसमें भाग्य की कोई भूमिका ही नहीं होती।

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     भाग्य और किस्मत कि बात करें तो व्यक्ति के सफलता और असफलता में इन दोनों का कोई महत्व नहीं हैं। व्यक्ति कि सफलता और असफलता केवल कर्म की प्रतिक्रिया (Reaction of Action) से होती हैं। जो काम वह करता हैं और जो उसका परिणाम आता हैं उसी पे सारी सफलता और असफलता निर्भर करती हैं।

      उदाहरण से समझते हैं मान लीजिये आपको यदि एक पत्थर को तोड़ना हैं तो उसपे चोट मरेंगे तो वह टूटेगा नहीं मारेंगे तो नहीं टूटेगा। आप जो भी क्रिया करंगे उसी का प्रतिक्रिया होगा। इसमें किस्मत या भाग्य की बात कहाँ हैं। किन्तु फिर भी इसे हम भाग्य से जोड़ कर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं।


3. बहाना करना और अपने आप से झूठ बोलना 

        अक्सर लोग काम को टालने या काम से बचने के लिए कोई न कोई ठोस बहाना ढूंढ़ ही लेते हैं। कोई न कोई उत्तम विकल्प ढूंढ़ ही लेते हैं जिससे कि खुद को समझा सके की इस वजह से वो अपना काम नहीं कर पाए और फिर जीवन भर उस बहाने/विकल्प कि आड़ में खुद बचाते रहते हैं। 

     जीवन भर खुद से झूठ बोलते रहते हैं कि इस वजह से मै असफल हो गया। ये लोग इतने कमजोर होते हैं कि एक बार भी खुद से सच नहीं बोल पाते या अपनी असफलता की असली वजह को स्वीकार नहीं कर पाते।

       
     याद रखिए काम करने वालो के लिए काम न करने का कोई विकल्प ही नहीं होता। समय का अंतर हो सकता हैं,  किन्तु न करने का विकल्प नहीं होता। विकल्प सिर्फ कमजोर और कामचोर लोगो के लिए होता हैं। हर सफल व्यक्ति के पास हजारों बहाने और वजह थे काम न करने के लेकिन उनका फोकस सिर्फ और सिर्फ काम और लक्ष्य पे था इसलिए वो सफल हो गए। 

    मुझे विस्वास हैं की ऊपर लिखी बातो को ध्यान में रखते हुए आप भी अपनी असफलता को किसी बहाने की आड़ में छुपाने की कोशिश नहीं करेंगे बल्कि सच को स्वीकारते हुए दुबारा कोशिश करेंगे और तब तक कोशिश करते रहेंगे जब तक लक्ष्य प्राप्त न कर लें।


उम्मीद करता हूं कि इस प्रेरणादायक कविता से आपको काफी प्रेरणा मिली होगी। ऐसी ही और प्रेरणादायक कविताएं पढ़ने के लिए आप मेरी वेबसाइट  www.powerfulpoetries.com पर जा सकते है जहां से आप अपने आप को लगातार Motivate कर सकते है।


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Thank you for reading this

Hindi Motivational Poem

"This is not only a Hindi Motivational Poem but also a Life Changing Poem."


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