आत्मविश्वास बढ़ाने वाली हिन्दी प्रेरक कविता। है यकीन खुद पे जिन्हें ।


Hindi Poem for self Confidence

confidence boosting poem in hindi , Hindi prerak kavita

आत्मविश्वास बढ़ाने वाली हिन्दी प्रेरक कविता


ठोकर लगती है राहों में 
वो फिर भी नहीं ठहरते है।
है यकीन खुद पे जिन्हे
वो चलने से नहीं डरते है।

भीड़ में भी अपने दम पर
जो बाजी जीत कर हंसते है।
सच नहीं कि मुश्किलों में
वो कभी नहीं फंसते है।


दौर में ही मुसीबतों के
वो खिलते और निखरते है
है यकीन खुद पे जिन्हे
वो चलने से नहीं डरते है।



हर इल्म हमारे अन्दर है
इस बात को समझा करते है।
कठिनाई की भंवर जाल में
कहीं न उलझा करते है


उलझनों के चौराहें पे 
समझ बन उभरते है।
है यकीन खुद पे जिन्हे
वो चलने से नहीं डरते है।

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बिस्वास उन्हें है मेहनत में
संघर्ष उनका हथियार है।
साहस के तीर- धनुष लेकर
हर युद्ध को तैयार है।


हार जीत की फिक्र नहीं
निरन्तर लड़ते रहते है।
है यकीन खुद पे जिन्हे
वो चलने से नहीं डरते है।


देख खड़े राहों में उनको
राह बदल कर जाती है।
मुश्किलें इन कर्म वीरों से
कहां कभी टकराती है।


हौसलों के पंख लगा
ऊंची उड़ान वो भरते है।
है यकीन खुद पे जिन्हे
वो चलने से नहीं डरते है।


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(इस कविता का copyright कराया जा चुका है। इस कविता का मकसद आपको प्रेरित करना है। किसी भी व्यायसायिक कार्य में बिना अनुमति के इसका प्रयोग वर्जित है।)

निचे इस कविता का उदेश्य एवं संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा हैं जिसे आपको अवश्य ही पढ़नी चहिये क्योंकि यह प्रेरणा से भरा हुआ एक अति-प्रेरणादायक लेख हैं।

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कविता का उद्देश्य एवं संक्षिप्त विवरण

ठोकर लगती है राहों में 
वो फिर भी नहीं ठहरते है।
है यकीन खुद पे जिनको
वो चलने से नहीं डरते है।


इस हिंदी प्रेरक कविता में ऐसे लोगो के बारे में बताया जा रहा है जो दृढ़ निश्चयी है, जिन्हें रास्ते में कितनी भी ठोकर लग जाए किन्तु वो चलना नहीं छोड़ते है क्योंकि उन्हें अपने आप पे भरोसा है की वो किसी भी परिस्थिति से निपट लेंगे। उन्हें खुद के ऊपर दृढ़ बिस्वास है कि वो हर हालात से निपट सकते है।

सच कहा जाए तो अपने ऊपर ऐसा बिस्वास बहुत ही कम लोगो को होता है और जिन्हें होता है वो कहीं न कहीं सफल हो ही जाते है क्योंकि वो हर चुनौती से निपट कर आगे बढ़ते जाते है। 

देखिए किसी भी क्षेत्र में  सफलता के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है क्योंकि मान लीजिए आपको स्नातक (बी ए, बी कॉम या बी एस सी) करना है और आपका मन बार बार कह रहा है कि आप नहीं कर सकते है तो यह निश्चत है कि आप नहीं कर पाओगे और आपको बीच में ही ड्रॉप आउट करना पड़ सकता है। लेकिन आपके आस पास ही एक व्यक्ति ऐसा है जो पी एच डी कर जाता है, क्यों?  क्यूंकि उसे भरोसा है कि वो पी एच डी भी कर लेगा और कर ही लेता है।

हमारा दिमाग एक कर्मचारी जैसा है वो खुद से नहीं सोच सकता, हम जैसा निर्देश देते है वो वैसा ही सोचता है। यदि हम उसे निर्देश देते है कि ये काम नहीं किया जा सकता तो वो कई सारे तथ्य और कारण हमारे सामने रख देता है जिससे कि ये साबित हो जाता है कि ये काम सच में नहीं किया जा सकता। और यदि उसी काम के लिए दिमाग को ये निर्देश दिया जाए की ये काम तो बिल्कुल किया जा सकता है तो अब देखिए वहीं दिमाग पहले के उलट इतने सारे तथ्य और तरीके आपके सामने रख देगा कि आपको लगने लगेगा की हा ये काम तो बिल्कुल किया जा सकता है।  


            

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अब देखिए मस्तिष्क तो वहीं है, इसकी क्षमता भी वही है फिर भी एक ही काम के लिए दो विकल्प क्यों बताया इसने, क्यूंकि हमने इसे निर्देश दिया था। हमने इसे जो उसे कमांड दिया था उसने वहीं आउटपुट हमारे सामने रख दिया ठीक Google जैसे जो हम सर्च करते है वहीं डिस्प्ले पे आ जाता है। तो आपको भी बस ऐसा ही करना है कि अपने ऊपर भरोसा रखना है और दिमाग को सही इनपुट देना है। ये बहुत ही शक्तिशाली है हर काम को करने के लिए कई सारे तरीके आपके सामने रख देगा और हर समस्या के एक नहीं कई सारे समाधान भी आपके सामने रख देगा।  

भीड़ में भी अपने दम पर
जो बाजी जीत कर हंसते है।
सच नहीं कि मुश्किलों में
वो नहीं कभी फंसते है।

दौर में ही मुसीबतों के
खिलते और निखरते है
है यकीन खुद पे जिनको
वो चलने से नहीं डरते है।

अब आप अपने दिमाग पे जरा जोर डालिए और यकीन कीजिए कि आप भारत के दस अमीर लोगों में से एक है, जी हां एक बार कोशिश तो कीजिए। क्या हुआ नहीं कर पा रहे है, तो अब उन दस लोगों को देखिए क्या वो इंसान नहीं है, क्या उनका शारीरिक संरचना आपसे अलग, गौर से देखिए कहीं उनके पास चार हाथ, चार पैर और दो दिमाग तो नहीं है या फिर पता कीजिए की जन्म लेने के बजाय अवतार तो नहीं लिया है उन्होंने। आप समझ पा रहे है मै क्या कहना चाह रहा हूं, मै आपको ये बताने की कोशिश कर रहा हूं कि जो लोग भी सफलता के शिखर पे पहुंचते है वो भी हमारे जैसे सामान्य लोग ही है। फर्क बस इतना ही है कि जो समस्या हमें दिखती है वो उनके सामने भी आती है किन्तु वो उस समस्या से गुजर कर परिपक्व हो जाते है और हम समस्या देख कर ही चित हो जाते है यानी हार मान लेते है। बस यही फर्क है और इसी अंतर के कारण वो भारत के सबसे अमीर लोग है और हम एक सामान्य जीवन जीने के लिए मजबूर है।

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उम्मीद करता हूं कि इस प्रेरणादायक कविता से आपको काफी प्रेरणा मिली होगी ऐसे ही और प्रेरणादायक कविताएं पढ़ने के लिए आप मेरी वेबसाइट  www.powerfulpoetries.com  पर जा सकते है जहां से आप आपने आप को लगातार Motivate कर सकते है।


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